प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के नेतृत्व पर छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने पारित किया अभिनंदन प्रस्ताव, पूर्व अग्निवीरों की भर्ती और विभाग के नाम परिवर्तन को मंजूरी

8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से लेकर नक्सलमुक्त बस्तर तक, छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र के सहयोग को बताया महत्वपूर्ण

पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती की अनुमति, आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर होगा जनजातीय कार्य विभाग

रायपुर, 11 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में लगातार 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों पर आधारित ऐतिहासिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में आधारभूत सुविधाओं, कृषि, महिला सशक्तीकरण, जनजातीय विकास, निवेश और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए सुशासन और तकनीक आधारित प्रशासन के प्रयोगों से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में लिए गए राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों तक, उनकी कार्यशैली का प्रभाव राज्यों के विकास पर भी पड़ा है। मंत्रिपरिषद ने जीएसटी, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और नक्सलवाद के उन्मूलन जैसे विषयों पर लिए गए निर्णयों का अभिनंदन किया। साथ ही, सहकारी संघवाद के माध्यम से राज्यों को संसाधन उपलब्ध कराने और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में केंद्र के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

छत्तीसगढ़ को मिले 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए कई नीतिगत और प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 के माध्यम से औद्योगिक अनुमतियों की प्रक्रिया सरल की गई है। निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने पर स्वतः स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो प्रणाली और दो जनविश्वास अधिनियमों के माध्यम से 279 गैर-जरूरी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे संचालन की अनुमति देने सहित 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य को 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनसे 1.60 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। पीएम गतिशक्ति के तहत तकनीक आधारित योजना और निगरानी को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य के लगभग 20 हजार गांवों में से करीब 14 हजार गांवों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य पूरा किया जा चुका है।

आवास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को मिला विस्तार

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में 20.65 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2.25 लाख पक्के आवास पूर्ण हो चुके हैं। पिछले पौने तीन वर्षों में 11.78 लाख आवासों का निर्माण किया गया है। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत 2,437 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से 36 लाख घरेलू और 14,970 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। प्रदेश के 18,653 गांवों को ओडीएफ प्लस घोषित किया गया है।

उज्ज्वला योजना के माध्यम से 39.73 लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन मिले हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 2.49 करोड़ पात्र हितग्राहियों के कार्ड बनाए गए हैं। इसके माध्यम से 51.17 लाख हितग्राहियों को लगभग 11,877 करोड़ रुपये का निःशुल्क उपचार मिला है। वहीं, 70 वर्ष से अधिक आयु के 6.21 लाख वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना कार्ड जारी किए गए हैं।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के माध्यम से प्रदेश के 73 लाख परिवारों के लगभग 1.99 करोड़ हितग्राहियों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार से लगभग 5,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई है।

किसानों को 33,431 करोड़ रुपये का एमएसपी भुगतान

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के 26.57 लाख किसानों के खातों में सहायता राशि पहुंची है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 5,064 करोड़ रुपये का केंद्रीय अंश प्रीमियम प्राप्त हुआ है।

वर्ष 2015 की तुलना में पंजीकृत किसानों की संख्या 13.17 लाख से बढ़कर 27.53 लाख हो गई है। वहीं, पंजीकृत कृषि रकबा 21.26 लाख से बढ़कर 33 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। धान उपार्जन 59 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन के स्तर पर पहुंचा है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से 33,431 करोड़ रुपये और बोनस के रूप में 10,292 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

महिला सशक्तीकरण और युवाओं के लिए बढ़े अवसर

महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 68 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि के साथ 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान योजना के अंतर्गत 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वन धन विकास केंद्रों से 70 हजार से अधिक जनजातीय महिलाएं जुड़ी हैं।

खेलो इंडिया योजना के तहत प्रदेश के आठ जिलों के लिए 48 करोड़ रुपये की सहायता और 33 मिनी सेंटर स्वीकृत किए गए हैं। बिलासपुर में हॉकी, आर्चरी और एथलेटिक्स के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को भी मंजूरी मिली है।

जनजातीय क्षेत्रों में आवास, सड़क और शिक्षा पर जोर

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस घोषित किए जाने को जनजातीय समाज के योगदान के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के 6,000 से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

पीएम जनमन योजना के तहत 18 जिलों में निवासरत पांच विशेष पिछड़ी जनजातियों के 56 हजार से अधिक परिवारों तक पक्के आवास, सड़क और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। प्रदेश के 26 जिलों में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। लघु वनोपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी के माध्यम से छह लाख संग्राहकों को 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। नवा रायपुर में डिजिटल जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय की स्थापना भी की गई है।

केंद्रीय करों से छत्तीसगढ़ को मिले 3.46 लाख करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने से राज्यों को अधिक संसाधन उपलब्ध हुए हैं। पिछले 12 वर्षों में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 3,46,806 करोड़ रुपये मिले हैं, जो वर्ष 2004 से 2014 के दौरान प्राप्त 47,100 करोड़ रुपये की तुलना में 7.4 गुना अधिक है।

जिला खनिज न्यास के माध्यम से राज्य को 17,887 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिनसे 81 हजार से अधिक विकास कार्य किए गए हैं। जीएसटी लागू होने से चेकपोस्ट संबंधी बाधाएं समाप्त हुईं और देशभर में एकीकृत बाजार को बढ़ावा मिला। राज्य को 22,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जीएसटी क्षतिपूर्ति सहायता भी मिली है।

सड़क, रेल और ऊर्जा परियोजनाओं को गति

प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 35,766 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कुल 18,215 करोड़ रुपये की लागत वाली 37 परियोजनाओं पर काम जारी है। रायपुर-विशाखापट्टनम सिक्स-लेन एक्सप्रेसवे, बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव फोरलेन मार्ग और रायपुर-दुर्ग सिक्स-लेन बायपास जैसी परियोजनाओं से परिवहन और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रेलवे के क्षेत्र में लगभग 54 हजार करोड़ रुपये की नई रेल लाइन, दोहरीकरण, फ्लाईओवर और पुल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। डिजिटल भारत निधि के तहत दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के लिए 1,643 मोबाइल टावर स्वीकृत किए गए हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। रायगढ़ के लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की क्षमता 4,000 से बढ़ाकर 4,800 मेगावाट की गई है। केंद्रीय सहायता से 9.30 लाख घरों को नए बिजली कनेक्शन मिले हैं। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1.16 लाख से अधिक घरों में सौर संयंत्र लगाए गए हैं, जिसके लिए 670 करोड़ रुपये की केंद्रीय सब्सिडी जारी की गई है।

नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई उम्मीद

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों तथा सुरक्षाबलों के साहस से 31 मार्च 2026 को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्र से 2,080 करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्राप्त हुई है। आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 5,671 का निर्माण जारी है।

दूरस्थ क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए आरसीपीएलडब्ल्यूई के तहत 267 सड़कें और आठ पुल पूरे किए गए हैं। पीएमजीएसवाई-4 के अंतर्गत 699 करोड़ रुपये की लागत से 228 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। हिंसा के कारण वर्षों से बंद 421 स्कूल दोबारा खोले गए हैं। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया। वन रैंक वन पेंशन, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का सृजन और अनुच्छेद 370 की समाप्ति को भी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निर्णयों में शामिल किया।

काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर के निर्माण एवं प्राण प्रतिष्ठा को सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से जोड़ते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में अयोध्या धाम श्रीरामलला दर्शन योजना संचालित की जा रही है। प्रसाद योजना के तहत 48 करोड़ रुपये की सहायता से डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर का विकास कार्य पूरा हुआ है।

स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत जनजातीय पर्यटन सर्किट के लिए 94 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 146 करोड़ रुपये और जशपुर के मयाली-बगीचा इको-टूरिज्म के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। चंपारण में संत वल्लभाचार्य की मूर्ति और कॉम्प्लेक्स के लिए 73.42 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से पीएम एकता मॉल और नवा रायपुर में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) की स्थापना को भी स्वीकृति मिली है।

विकसित छत्तीसगढ़ से विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के संकल्प में योगदान देने के लिए राज्य ने छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 का रोडमैप तैयार किया है। नक्सलमुक्त बस्तर, खनिज एवं ऊर्जा संसाधन, मेहनती किसान, सशक्त महिलाएं, युवा शक्ति, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और निवेश के अनुकूल वातावरण प्रदेश की प्रमुख ताकत हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ समृद्ध, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी

मंत्रिपरिषद की बैठक में पूर्व अग्निवीरों के अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य की सेवाओं में लेने के उद्देश्य से गृह विभाग में आरक्षक के कुल 36 पदों पर उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध भर्ती की अनुमति दी गई। पूर्व अग्निवीरों के लिए इन पदों पर 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग किया जाएगा।

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