बंदूक की जगह हाथ में ‘आशीर्वाद का दीया’

अबूझमाड़ में हिंसा के अंधेरे से जनसेवा और आत्मनिर्भरता की नई भोर

रायपुर, 18 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला और विशेष रूप से अबूझमाड़ का दुर्गम क्षेत्र लंबे समय तक भय, हिंसा और नक्सली साए की भयावहता झेलता रहा। कभी जिन हाथों ने भटकाव की राह पर बंदूकें उठाई थीं, वे अब समाज निर्माण और आत्मनिर्भरता का एक नया अध्याय लिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025’ ने अबूझमाड़ के युवाओं को केवल हथियार छोड़ने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके लिए सम्मानजनक जीवन, परिवार से पुनर्मिलन और आर्थिक स्वावलंबन के नए द्वार खोल दिए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की उपलब्ध सामग्री के अनुसार, यह नीति आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और हिंसा से प्रभावित नागरिकों के लिए पुनर्वास एवं सहायता का प्रावधान करती है।

हिंसा के अंधियारे को पीछे छोड़ मुख्यधारा में लौटे ये आत्मसमर्पित व्यक्ति अब केवल अपनी आजीविका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनसेवा और सामाजिक आयोजनों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में जब इन्होंने एक साथ दीप प्रज्ज्वलित किए, तो वह केवल एक आयोजन भर नहीं था, बल्कि अबूझमाड़ के दूरस्थ अंचलों में शांति, सद्भावना और सामाजिक स्वीकार्यता का एक संदेश था। इस सहभागिता ने समाज में आपसी विश्वास को मजबूत करने का संदेश देते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प से इसे जोड़ा है।

यह बदलाव इस बात को रेखांकित करता है कि जब पुनर्वास की नीतियां आजीविका, सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ती हैं, तो हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में मुख्यधारा से जुड़ने के नए अवसर बन सकते हैं।

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